vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 13: अनुशासन पर्व
»
अध्याय 32: वीतहव्यके पुत्रोंसे काशी-नरेशोंका घोर युद्ध, प्रतर्दनद्वारा उनका वध और राजा वीतहव्यको भृगुके कथनसे ब्राह्मणत्व प्राप्त होनेकी कथा
»
श्लोक 66
श्लोक
13.32.66
एवं विप्रत्वमगमद् वीतहव्यो नराधिप:।
भृगो: प्रसादाद् राजेन्द्र क्षत्रिय: क्षत्रियर्षभ॥ ६६॥
अनुवाद
राजेंद्र! क्षत्रियशिरोमणे! इस प्रकार भृगु की कृपा से राजा वीतहव्य क्षत्रिय होते हुए भी ब्राह्मण बन गये। 66॥
Rajendra! Kshatriyashiromane! In this way, King Veethavya, despite being a Kshatriya, became a Brahmin due to the blessings of Bhrigu. 66॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd