श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 32: वीतहव्यके पुत्रोंसे काशी-नरेशोंका घोर युद्ध, प्रतर्दनद्वारा उनका वध और राजा वीतहव्यको भृगुके कथनसे ब्राह्मणत्व प्राप्त होनेकी कथा  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  13.32.65 
प्रमद्वरायां तु रुरो: पुत्र: समुदपद्यत।
शुनको नाम विप्रर्षिर्यस्य पुत्रोऽथ शौनक:॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
रुरु के गर्भ से ब्रह्मर्षि शुनक उत्पन्न हुए जिनके पुत्र शुनक मुनि हुए ॥65॥
 
Brahmarshi Shunak was born from Ruru's womb, whose son is Shunak Muni. 65॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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