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mahabharat 13.32.63: ऋषि के पुत्र महर्षि श्राव, श्राव के पुत्र तम और तम के पुत्र द्विज श्रेष्ठ प्रकाश हुए। प्रकाश के पुत्र विजेताओं में श्रेष्ठ वागिन्द्र हुए ॥63॥   |   mahabharat अध्याय 13.32: वीतहव्यके पुत्रोंसे काशी-नरेशोंका घोर युद्ध, प्रतर्दनद्वारा उनका वध और राजा वीतहव्यको भृगुके कथनसे ब्राह्मणत्व प्राप्त होनेकी कथा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 32: वीतहव्यके पुत्रोंसे काशी-नरेशोंका घोर युद्ध, प्रतर्दनद्वारा उनका वध और राजा वीतहव्यको भृगुके कथनसे ब्राह्मणत्व प्राप्त होनेकी कथा  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  13.32.63 
श्रवास्तस्य सुतश्चर्षि: श्रवसश्चाभवत् तम:।
तमसश्च प्रकाशोऽभूत् तनयो द्विजसत्तम:।
प्रकाशस्य च वागिन्द्रो बभूव जयतां वर:॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
ऋषि के पुत्र महर्षि श्राव, श्राव के पुत्र तम और तम के पुत्र द्विज श्रेष्ठ प्रकाश हुए। प्रकाश के पुत्र विजेताओं में श्रेष्ठ वागिन्द्र हुए ॥63॥
 
The saint's son Maharshi Shrava, Shrava's son Tama and Tama's son Dwija became the best light. Prakash's son was Vagindra, the best among conquerors. 63॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)