Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.32.56-57h: हे भृगुवंशी मुनि! मैंने इस राजा को जाति का त्याग करवाया था। महाराज! तत्पश्चात् मुनि की आज्ञा पाकर राजा प्रतर्दन ने जैसे सर्प अपना विष त्याग देता है, वैसे ही क्रोध त्याग दिया और जिस मार्ग से आया था, उसी मार्ग से लौट गया। | mahabharat अध्याय 13.32: वीतहव्यके पुत्रोंसे काशी-नरेशोंका घोर युद्ध, प्रतर्दनद्वारा उनका वध और राजा वीतहव्यको भृगुके कथनसे ब्राह्मणत्व प्राप्त होनेकी कथा । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
त्याजितो हि मया जातिमेष राजा भृगूद्वह।
ततस्तेनाभ्यनुज्ञातो ययौ राजा प्रतर्दन:॥ ५६॥
यथागतं महाराज मुक्त्वा विषमिवोरग:।
अनुवाद
हे भृगुवंशी मुनि! मैंने इस राजा को जाति का त्याग करवाया था। महाराज! तत्पश्चात् मुनि की आज्ञा पाकर राजा प्रतर्दन ने जैसे सर्प अपना विष त्याग देता है, वैसे ही क्रोध त्याग दिया और जिस मार्ग से आया था, उसी मार्ग से लौट गया।
O sage belonging to the Bhrigu dynasty, I made this king renounce his caste.' Maharaj! Thereafter, taking the sage's permission, King Pratardana gave up his anger just as a snake gives up its poison, and returned the same way he had come. 56 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥