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mahabharat 13.32.52-53h: तब पुण्यात्माओं में श्रेष्ठ भृगु ने दया करके उनसे कहा, 'हे राजन! यहाँ कोई क्षत्रिय नहीं है। सभी ब्राह्मण हैं।'   |   mahabharat अध्याय 13.32: वीतहव्यके पुत्रोंसे काशी-नरेशोंका घोर युद्ध, प्रतर्दनद्वारा उनका वध और राजा वीतहव्यको भृगुके कथनसे ब्राह्मणत्व प्राप्त होनेकी कथा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 32: वीतहव्यके पुत्रोंसे काशी-नरेशोंका घोर युद्ध, प्रतर्दनद्वारा उनका वध और राजा वीतहव्यको भृगुके कथनसे ब्राह्मणत्व प्राप्त होनेकी कथा  »  श्लोक 52-53h
 
 
श्लोक  13.32.52-53h 
तमुवाच कृपाविष्टो भृगुर्धर्मभृतां वर:॥ ५२॥
नेहास्ति क्षत्रिय: कश्चित् सर्वे हीमे द्विजातय:।
 
 
अनुवाद
तब पुण्यात्माओं में श्रेष्ठ भृगु ने दया करके उनसे कहा, 'हे राजन! यहाँ कोई क्षत्रिय नहीं है। सभी ब्राह्मण हैं।'
 
Then Bhrigu, the best of the virtuous, moved with compassion said to him, 'O King! There is no Kshatriya here. All of them are Brahmins.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)