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mahabharat 13.32.50: राजा ने कहा - ब्रह्मन्! राजा वीथव्य को यहाँ से निकाल दो। विप्रवर! उनके पुत्रों ने मेरे सम्पूर्ण कुल का नाश कर दिया है। 50॥   |   mahabharat अध्याय 13.32: वीतहव्यके पुत्रोंसे काशी-नरेशोंका घोर युद्ध, प्रतर्दनद्वारा उनका वध और राजा वीतहव्यको भृगुके कथनसे ब्राह्मणत्व प्राप्त होनेकी कथा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 32: वीतहव्यके पुत्रोंसे काशी-नरेशोंका घोर युद्ध, प्रतर्दनद्वारा उनका वध और राजा वीतहव्यको भृगुके कथनसे ब्राह्मणत्व प्राप्त होनेकी कथा  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  13.32.50 
राजोवाच
अयं ब्रह्मन्नितो राजा वीतहव्यो विसर्ज्यताम्।
तस्य पुत्रैर्हि मे कृत्स्नो ब्रह्मन् वंश: प्रणाशित:॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
राजा ने कहा - ब्रह्मन्! राजा वीथव्य को यहाँ से निकाल दो। विप्रवर! उनके पुत्रों ने मेरे सम्पूर्ण कुल का नाश कर दिया है। 50॥
 
The king said – Brahmin! Get King Veethavya out of here. Vipravara! Their sons have destroyed my entire clan. 50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)