श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 32: वीतहव्यके पुत्रोंसे काशी-नरेशोंका घोर युद्ध, प्रतर्दनद्वारा उनका वध और राजा वीतहव्यको भृगुके कथनसे ब्राह्मणत्व प्राप्त होनेकी कथा  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  13.32.49 
उवाच चैनं राजेन्द्र किं कार्यं ब्रूहि पार्थिव।
स चोवाच नृपस्तस्मै यदागमनकारणम्॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
और उसने पूछा, ‘राजेन्द्र! पृथ्वीनाथ! तुम मुझसे क्या चाहते हो, कहो।’ तब राजा ने उससे अपने आने का कारण बताया ॥49॥
 
And he asked, 'Rajendra! Prithvinath! What do you want from me, tell me.' Then the king told him the reason for his visit. ॥ 49॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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