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mahabharat 13.32.44: अपने सभी पुत्रों के मारे जाने पर राजा वीतहव्य अपना नगर छोड़कर महर्षि भृगु के आश्रम में चले गये।   |   mahabharat अध्याय 13.32: वीतहव्यके पुत्रोंसे काशी-नरेशोंका घोर युद्ध, प्रतर्दनद्वारा उनका वध और राजा वीतहव्यको भृगुके कथनसे ब्राह्मणत्व प्राप्त होनेकी कथा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 32: वीतहव्यके पुत्रोंसे काशी-नरेशोंका घोर युद्ध, प्रतर्दनद्वारा उनका वध और राजा वीतहव्यको भृगुके कथनसे ब्राह्मणत्व प्राप्त होनेकी कथा  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  13.32.44 
हतेषु तेषु सर्वेषु वीतहव्य: सुतेष्वथ।
प्राद्रवन्नगरं हित्वा भृगोराश्रममप्युत॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
अपने सभी पुत्रों के मारे जाने पर राजा वीतहव्य अपना नगर छोड़कर महर्षि भृगु के आश्रम में चले गये।
 
After all his sons were killed, King Vitahavya left his city and fled to the hermitage of Maharishi Bhrigu. 44.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)