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श्लोक 13.32.4  |
स केन कर्मणा प्राप्तो ब्राह्मण्यं राजसत्तम:।
वरेण तपसा वापि तन्मे व्याख्यातुमर्हसि॥ ४॥ |
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| अनुवाद |
| उन महाबली राजा वीतहव्य ने किस कर्म से, किस वरदान से अथवा किस तपस्या से ब्राह्मणत्व प्राप्त किया था? कृपया मुझे विस्तारपूर्वक बताइए॥4॥ |
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| By which deed, by which boon or by which austerity did that great king Vitahavya attain brahminhood? Kindly tell me this in detail. ॥ 4॥ |
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