श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 32: वीतहव्यके पुत्रोंसे काशी-नरेशोंका घोर युद्ध, प्रतर्दनद्वारा उनका वध और राजा वीतहव्यको भृगुके कथनसे ब्राह्मणत्व प्राप्त होनेकी कथा  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  13.32.4 
स केन कर्मणा प्राप्तो ब्राह्मण्यं राजसत्तम:।
वरेण तपसा वापि तन्मे व्याख्यातुमर्हसि॥ ४॥
 
 
अनुवाद
उन महाबली राजा वीतहव्य ने किस कर्म से, किस वरदान से अथवा किस तपस्या से ब्राह्मणत्व प्राप्त किया था? कृपया मुझे विस्तारपूर्वक बताइए॥4॥
 
By which deed, by which boon or by which austerity did that great king Vitahavya attain brahminhood? Kindly tell me this in detail. ॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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