Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.32.39-40: उसके रथ की गर्जना सुनकर, विचित्र प्रकार से युद्ध करने वाले, कवच से सुसज्जित, हैहय राजकुमार, शत्रुओं के रथों को नष्ट करने में समर्थ, नगर के आकार के विशाल रथों पर बैठकर नगर से बाहर निकले और धनुष उठाकर बाणों की वर्षा करते हुए प्रतर्दन पर आक्रमण कर दिया। | mahabharat अध्याय 13.32: वीतहव्यके पुत्रोंसे काशी-नरेशोंका घोर युद्ध, प्रतर्दनद्वारा उनका वध और राजा वीतहव्यको भृगुके कथनसे ब्राह्मणत्व प्राप्त होनेकी कथा । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उसके रथ की गर्जना सुनकर, विचित्र प्रकार से युद्ध करने वाले, कवच से सुसज्जित, हैहय राजकुमार, शत्रुओं के रथों को नष्ट करने में समर्थ, नगर के आकार के विशाल रथों पर बैठकर नगर से बाहर निकले और धनुष उठाकर बाणों की वर्षा करते हुए प्रतर्दन पर आक्रमण कर दिया।
Hearing the loud roar of his chariot, the Haihaya princes, who were fighting in a strange manner, decked in armour, came out of the city seated on huge chariots the size of cities, capable of destroying the chariots of their enemies, and with their bows raised, showering arrows, attacked Pratardana. 39-40.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥