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mahabharat 13.32.38: पिता की आज्ञा पाकर शत्रुओं के नगर को जीतकर वह वीर योद्धा अपने रथ के साथ शीघ्रतापूर्वक गंगा नदी पार करके वीतहव्य के पुत्रों की राजधानी की ओर चल पड़ा।   |   mahabharat अध्याय 13.32: वीतहव्यके पुत्रोंसे काशी-नरेशोंका घोर युद्ध, प्रतर्दनद्वारा उनका वध और राजा वीतहव्यको भृगुके कथनसे ब्राह्मणत्व प्राप्त होनेकी कथा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 32: वीतहव्यके पुत्रोंसे काशी-नरेशोंका घोर युद्ध, प्रतर्दनद्वारा उनका वध और राजा वीतहव्यको भृगुके कथनसे ब्राह्मणत्व प्राप्त होनेकी कथा  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  13.32.38 
सरथ: स तु संतीर्य गङ्गामाशु पराक्रमी।
प्रययौ वीतहव्यानां पुरीं परपुरञ्जय:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
पिता की आज्ञा पाकर शत्रुओं के नगर को जीतकर वह वीर योद्धा अपने रथ के साथ शीघ्रतापूर्वक गंगा नदी पार करके वीतहव्य के पुत्रों की राजधानी की ओर चल पड़ा।
 
On receiving the permission of his father, that valiant warrior who had conquered the enemy's city, quickly crossed the Ganga with his chariot and proceeded towards the capital of the sons of Vitahavya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)