Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.32.35: उसे देखकर सुदेव के पुत्र राजा दिवोदास बहुत प्रसन्न हुए और मन ही मन सोचने लगे कि वीतहव्य के पुत्र मेरे पुत्र के तेज से भस्म हो गए हैं। | mahabharat अध्याय 13.32: वीतहव्यके पुत्रोंसे काशी-नरेशोंका घोर युद्ध, प्रतर्दनद्वारा उनका वध और राजा वीतहव्यको भृगुके कथनसे ब्राह्मणत्व प्राप्त होनेकी कथा । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तं दृष्ट्वा परमं हर्षं सुदेवतनयो ययौ।
मेने च मनसा दग्धान् वैतहव्यान् स पार्थिव:॥ ३५॥
अनुवाद
उसे देखकर सुदेव के पुत्र राजा दिवोदास बहुत प्रसन्न हुए और मन ही मन सोचने लगे कि वीतहव्य के पुत्र मेरे पुत्र के तेज से भस्म हो गए हैं।
On seeing him, King Divodasa, the son of Sudeva, was very pleased. In his mind, he thought that the sons of Vitahavya were burnt by the brilliance of his son.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥