Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.32.34: वह रथ पर बैठा था और कमर में तलवार बाँधे हुए, वह धधकती हुई अग्नि के समान चमक रहा था। ढाल, तलवार और धनुष से सुसज्जित होकर, वह धनुष घुमाते हुए आगे बढ़ रहा था। 34.   |   mahabharat अध्याय 13.32: वीतहव्यके पुत्रोंसे काशी-नरेशोंका घोर युद्ध, प्रतर्दनद्वारा उनका वध और राजा वीतहव्यको भृगुके कथनसे ब्राह्मणत्व प्राप्त होनेकी कथा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 32: वीतहव्यके पुत्रोंसे काशी-नरेशोंका घोर युद्ध, प्रतर्दनद्वारा उनका वध और राजा वीतहव्यको भृगुके कथनसे ब्राह्मणत्व प्राप्त होनेकी कथा  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  13.32.34 
स रथी बद्धनिस्त्रिंशो बभौ दीप्त इवानल:।
प्रययौ स धनुर्धुन्वन् खड्गी चर्मी शरासनी॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
वह रथ पर बैठा था और कमर में तलवार बाँधे हुए, वह धधकती हुई अग्नि के समान चमक रहा था। ढाल, तलवार और धनुष से सुसज्जित होकर, वह धनुष घुमाते हुए आगे बढ़ रहा था। 34.
 
He sat on the chariot and with a sword tied to his waist, he shone like a blazing fire. Equipped with shield, sword and bow, he advanced forward twirling his bow. 34.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)