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श्लोक 13.32.30  |
तत इष्टिं चकारर्षिस्तस्य वै पुत्रकामिकीम्।
अथास्य तनयो जज्ञे प्रतर्दन इति श्रुत:॥ ३०॥ |
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| अनुवाद |
| तब ऋषि ने राजा से पुत्रेष्टि यज्ञ करवाया, जिससे उसे प्रतर्दन नामक एक प्रसिद्ध पुत्र हुआ ॥30॥ |
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| Then the sage made the king perform Putreshti Yagya. From this he had a famous son named Pratardan. 30॥ |
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