श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 32: वीतहव्यके पुत्रोंसे काशी-नरेशोंका घोर युद्ध, प्रतर्दनद्वारा उनका वध और राजा वीतहव्यको भृगुके कथनसे ब्राह्मणत्व प्राप्त होनेकी कथा  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  13.32.29 
अहमिष्टिं करिष्यामि पुत्रार्थं ते विशाम्पते।
वीतहव्यसहस्राणि येन त्वं प्रहरिष्यसि॥ २९॥
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! मैं तुम्हारे लिए पुत्र प्राप्ति हेतु यज्ञ करूँगा, जिसके प्रभाव से तुम वीतहव्य के हजारों पुत्रों का वध करोगे।'
 
Prajanaath! I will perform a yajna for you to get a son, with the help of which you will kill thousands of sons of Vithahavya.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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