श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 32: वीतहव्यके पुत्रोंसे काशी-नरेशोंका घोर युद्ध, प्रतर्दनद्वारा उनका वध और राजा वीतहव्यको भृगुके कथनसे ब्राह्मणत्व प्राप्त होनेकी कथा  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  13.32.28 
तमुवाच महाभागो भरद्वाज: प्रतापवान्।
न भेतव्यं न भेतव्यं सौदेव व्येतु ते भयम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर महाबली ऋषि भरद्वाज बोले, 'सुदेवनन्दन! डरो मत, डरो मत। तुम्हारा भय दूर हो जाए॥ 28॥
 
On hearing this, the mighty sage Bharadwaj said, 'Sudevanandan! Do not be afraid, do not be afraid. Your fear should go away.॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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