Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.32.27: हे प्रभु! मैं आपका शिष्य हूँ और आप मेरे गुरु हैं। गुरु के अपने शिष्य के प्रति स्वाभाविक स्नेह से मेरी रक्षा कीजिए। उन पापियों ने मेरे कुल में केवल मुझे ही जीवित छोड़ा है॥ 27॥ | mahabharat अध्याय 13.32: वीतहव्यके पुत्रोंसे काशी-नरेशोंका घोर युद्ध, प्रतर्दनद्वारा उनका वध और राजा वीतहव्यको भृगुके कथनसे ब्राह्मणत्व प्राप्त होनेकी कथा । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे प्रभु! मैं आपका शिष्य हूँ और आप मेरे गुरु हैं। गुरु के अपने शिष्य के प्रति स्वाभाविक स्नेह से मेरी रक्षा कीजिए। उन पापियों ने मेरे कुल में केवल मुझे ही जीवित छोड़ा है॥ 27॥
O Lord! I am your disciple and you are my Guru. Please protect me with the natural affection that a Guru has for his disciple. Those sinners have left only me as a survivor in my family.॥ 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥