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mahabharat 13.32.20: महाबली राजा दिवोदास नगर से बाहर आए और उन राजकुमारों से युद्ध करने लगे। उनका युद्ध देवताओं और दानवों के बीच होने वाले युद्ध के समान भयंकर था।   |   mahabharat अध्याय 13.32: वीतहव्यके पुत्रोंसे काशी-नरेशोंका घोर युद्ध, प्रतर्दनद्वारा उनका वध और राजा वीतहव्यको भृगुके कथनसे ब्राह्मणत्व प्राप्त होनेकी कथा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 32: वीतहव्यके पुत्रोंसे काशी-नरेशोंका घोर युद्ध, प्रतर्दनद्वारा उनका वध और राजा वीतहव्यको भृगुके कथनसे ब्राह्मणत्व प्राप्त होनेकी कथा  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  13.32.20 
स निष्क्रम्य ददौ युद्धं तेभ्यो राजा महाबल:।
देवासुरसमं घोरं दिवोदासो महाद्युति:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
महाबली राजा दिवोदास नगर से बाहर आए और उन राजकुमारों से युद्ध करने लगे। उनका युद्ध देवताओं और दानवों के बीच होने वाले युद्ध के समान भयंकर था।
 
The mighty and powerful king Divodasa came out of the city and fought with those princes. Their battle was as fierce as the war between gods and demons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)