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mahabharat 13.32.2: हे सत्पुरुषों में श्रेष्ठ पितामह! परंतु ऐसा सुना जाता है कि पूर्वकाल में विश्वामित्र जी इसी शरीर में ब्राह्मणत्व को प्राप्त हुए थे और आप जो कह रहे हैं कि यह अत्यंत दुर्लभ है (ये दोनों बातें परस्पर विरोधी प्रतीत होती हैं)।   |   mahabharat अध्याय 13.32: वीतहव्यके पुत्रोंसे काशी-नरेशोंका घोर युद्ध, प्रतर्दनद्वारा उनका वध और राजा वीतहव्यको भृगुके कथनसे ब्राह्मणत्व प्राप्त होनेकी कथा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 32: वीतहव्यके पुत्रोंसे काशी-नरेशोंका घोर युद्ध, प्रतर्दनद्वारा उनका वध और राजा वीतहव्यको भृगुके कथनसे ब्राह्मणत्व प्राप्त होनेकी कथा  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  13.32.2 
विश्वामित्रेण च पुरा ब्राह्मण्यं प्राप्तमित्युत।
श्रूयते वदसे तच्च दुष्प्रापमिति सत्तम॥ २॥
 
 
अनुवाद
हे सत्पुरुषों में श्रेष्ठ पितामह! परंतु ऐसा सुना जाता है कि पूर्वकाल में विश्वामित्र जी इसी शरीर में ब्राह्मणत्व को प्राप्त हुए थे और आप जो कह रहे हैं कि यह अत्यंत दुर्लभ है (ये दोनों बातें परस्पर विरोधी प्रतीत होती हैं)।
 
Grandfather, the best among the good men! But it is heard that in the past, Vishwamitra ji had attained brahminhood in this very body and what you are saying about it being very rare (these two things seem to be contradictory to each other).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)