श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 32: वीतहव्यके पुत्रोंसे काशी-नरेशोंका घोर युद्ध, प्रतर्दनद्वारा उनका वध और राजा वीतहव्यको भृगुके कथनसे ब्राह्मणत्व प्राप्त होनेकी कथा  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  13.32.11 
स वीतहव्यदायादैरागत्य पुरुषर्षभ।
गङ्गायमुनयोर्मध्ये संग्रामे विनिपातित:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
पुरुषप्रवर! वीथव्य के पुत्रों ने हर्यश्व के राज्य पर आक्रमण करके उसे गंगा-यमुना के युद्ध में मार डाला॥11॥
 
Purushpravar! Veethavya's sons attacked Haryashwa's kingdom and killed him in the battle between Ganga and Yamuna. 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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