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mahabharat 13.30.9: तत्पश्चात् तीस बार समय व्यतीत हो जाने पर वह वैश्य लोक में आता है और बहुत समय तक उस लोक में विचरण करता रहता है॥9॥   |   mahabharat अध्याय 13.30: ब्राह्मणत्व प्राप्त करनेका आग्रह छोड़कर दूसरा वर माँगनेके लिये इन्द्रका मतङ्गको समझाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 30: ब्राह्मणत्व प्राप्त करनेका आग्रह छोड़कर दूसरा वर माँगनेके लिये इन्द्रका मतङ्गको समझाना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  13.30.9 
ततस्त्रिंशद्‍गुणे काले लभते वैश्यतामपि।
वैश्यतायां चिरं कालं तत्रैव परिवर्तते॥ ९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् तीस बार समय व्यतीत हो जाने पर वह वैश्य लोक में आता है और बहुत समय तक उस लोक में विचरण करता रहता है॥9॥
 
‘After that, after thirty times the time has passed, he comes into the Vaishya world and continues to roam around in that world for a long time.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)