Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.30.6: यदि कोई प्राणी पशु या पक्षी की योनि में रहकर कभी मनुष्य योनि में जाता है, तो इसमें कोई संदेह नहीं कि वह पहले पुलकश या चाण्डाल के रूप में जन्म लेता है॥6॥   |   mahabharat अध्याय 13.30: ब्राह्मणत्व प्राप्त करनेका आग्रह छोड़कर दूसरा वर माँगनेके लिये इन्द्रका मतङ्गको समझाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 30: ब्राह्मणत्व प्राप्त करनेका आग्रह छोड़कर दूसरा वर माँगनेके लिये इन्द्रका मतङ्गको समझाना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  13.30.6 
तिर्यग्योनिगत: सर्वो मानुष्यं यदि गच्छति।
स जायते पुल्कसो वा चण्डालो वाप्यसंशय:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
यदि कोई प्राणी पशु या पक्षी की योनि में रहकर कभी मनुष्य योनि में जाता है, तो इसमें कोई संदेह नहीं कि वह पहले पुलकश या चाण्डाल के रूप में जन्म लेता है॥6॥
 
If any living being which has been in the womb of an animal or a bird ever goes to the womb of a human being, then it is without a doubt that it is first born as a Pulkasa or a Chandala.॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)