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mahabharat 13.30.4: तुम मूर्ख हो! इस जन्म में ब्राह्मणत्व प्राप्त नहीं कर सकते। उस अप्राप्य वस्तु की प्रार्थना करते-करते तुम शीघ्र ही मर जाओगे।'   |   mahabharat अध्याय 13.30: ब्राह्मणत्व प्राप्त करनेका आग्रह छोड़कर दूसरा वर माँगनेके लिये इन्द्रका मतङ्गको समझाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.30.4 
न हि शक्यं त्वया प्राप्तुं ब्राह्मण्यमिह दुर्मते।
अप्राप्यं प्रार्थयानो हि नचिराद् विनशिष्यसि॥ ४॥
 
 
अनुवाद
तुम मूर्ख हो! इस जन्म में ब्राह्मणत्व प्राप्त नहीं कर सकते। उस अप्राप्य वस्तु की प्रार्थना करते-करते तुम शीघ्र ही मर जाओगे।'
 
‘You are a fool! You cannot achieve brahminhood in this life. You will soon die praying for that unobtainable thing.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)