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mahabharat 13.30.2: तब इन्द्रदेव उसके पास आये और बोले, 'बेटा! ब्राह्मण होना दुर्लभ है। माँगने पर भी तुम्हें यह नहीं मिलेगा।'   |   mahabharat अध्याय 13.30: ब्राह्मणत्व प्राप्त करनेका आग्रह छोड़कर दूसरा वर माँगनेके लिये इन्द्रका मतङ्गको समझाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 30: ब्राह्मणत्व प्राप्त करनेका आग्रह छोड़कर दूसरा वर माँगनेके लिये इन्द्रका मतङ्गको समझाना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  13.30.2 
तमुवाच तत: शक्र: पुनरेव महायशा:।
ब्राह्मण्यं दुर्लभं तात प्रार्थयानो न लप्स्यसे॥ २॥
 
 
अनुवाद
तब इन्द्रदेव उसके पास आये और बोले, 'बेटा! ब्राह्मण होना दुर्लभ है। माँगने पर भी तुम्हें यह नहीं मिलेगा।'
 
Then the illustrious Indra came back to him and said, 'Son! Being a Brahmin is rare. You will not be able to get it even if you ask for it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)