श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 3: विश्वामित्रको ब्राह्मणत्वकी प्राप्ति कैसे हुई—इस विषयमें युधिष्ठिरका प्रश्न  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  13.3.7 
हरिश्चन्द्रक्रतौ देवांस्तोषयित्वाऽऽत्मतेजसा।
पुत्रतामनुसम्प्राप्तो विश्वामित्रस्य धीमत:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
हरिश्चंद्र के उस यज्ञ में विश्वामित्र ने अपने पराक्रम से देवताओं को संतुष्ट करके शुनःशेप को मुक्त कर दिया था; इसीलिए उसने बुद्धिमान विश्वामित्र के पुत्र का पद प्राप्त किया था ॥7॥
 
In that yagya of Harishchandra, Vishwamitra had freed Shunashep by satisfying the gods with his might; That's why he attained the status of son of wise Vishwamitra. 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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