श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 3: विश्वामित्रको ब्राह्मणत्वकी प्राप्ति कैसे हुई—इस विषयमें युधिष्ठिरका प्रश्न  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  13.3.18 
एतत् तत्त्वेन मे तात सर्वमाख्यातुमर्हसि।
मतङ्गस्य यथातत्त्वं तथैवैतद् वदस्व मे॥ १८॥
 
 
अनुवाद
पिताश्री! कृपया मुझे यह सब सत्य बताइए। जिस प्रकार तपस्या करने पर भी मतंग ब्राह्मणत्व प्राप्त नहीं कर पाए, उसी प्रकार विश्वामित्र भी ब्राह्मण क्यों नहीं हुए? कृपया मुझे यह बताइए।
 
Father! Please tell me the truth about all this. Just as Matanga did not attain brahminhood despite performing penance, why did the same not happen with Vishwamitra? Please tell me this.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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