श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 3: विश्वामित्रको ब्राह्मणत्वकी प्राप्ति कैसे हुई—इस विषयमें युधिष्ठिरका प्रश्न  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  13.3.17 
किमेतदिति तत्त्वेन प्रब्रूहि भरतर्षभ।
देहान्तरमनासाद्य कथं स ब्राह्मणोऽभवत्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! यह क्या है? मुझे ठीक-ठीक बताओ। विश्वामित्र बिना दूसरा शरीर धारण किए ब्राह्मण कैसे हो गए?॥17॥
 
O best of the Bharatas! What is this? Tell me exactly. How did Vishwamitra become a Brahmin without taking another body?॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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