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mahabharat 13.3.12-13: पूर्वकाल में विश्वामित्र के भय से श्रीमन वसिष्ठ ने अपने शरीर को रस्सी से बाँधकर नदी के जल में डुबो दिया था; किन्तु वे उस नदी के बंधन से मुक्त होकर पुनः ऊपर आ गए थे। महात्मा वसिष्ठ के महान् कार्य से विख्यात वह पवित्र नदी उसी दिन से 'विपाशा' नाम से विख्यात हुई॥12-13॥   |   mahabharat अध्याय 13.3: विश्वामित्रको ब्राह्मणत्वकी प्राप्ति कैसे हुई—इस विषयमें युधिष्ठिरका प्रश्न   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 3: विश्वामित्रको ब्राह्मणत्वकी प्राप्ति कैसे हुई—इस विषयमें युधिष्ठिरका प्रश्न  »  श्लोक 12-13
 
 
श्लोक  13.3.12-13 
तथैवास्य भयाद् बद्‍ध्वा वसिष्ठ: सलिले पुरा।
आत्मानं मज्जयन् श्रीमान् विपाश: पुनरुत्थित:॥ १२॥
तदाप्रभृति पुण्या हि विपाशाभून्महानदी।
विख्याता कर्मणा तेन वसिष्ठस्य महात्मन:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
पूर्वकाल में विश्वामित्र के भय से श्रीमन वसिष्ठ ने अपने शरीर को रस्सी से बाँधकर नदी के जल में डुबो दिया था; किन्तु वे उस नदी के बंधन से मुक्त होकर पुनः ऊपर आ गए थे। महात्मा वसिष्ठ के महान् कार्य से विख्यात वह पवित्र नदी उसी दिन से 'विपाशा' नाम से विख्यात हुई॥12-13॥
 
In the past, fearing Vishwamitra, Shriman Vasishtha had tied his body with a rope and was drowning himself in the water of a river; but he came up again free from the bondage of that river. Known for the great deed of Mahatma Vasishtha, that holy river came to be known as 'Vipasha' from that day.॥ 12-13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)