Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.3.1-2: युधिष्ठिर ने पूछा - महाराज! नरेश्वर! यदि अन्य तीनों वर्णों के लिए ब्राह्मणत्व प्राप्त करना अत्यन्त कठिन है, तो क्षत्रिय कुल में उत्पन्न महात्मा विश्वामित्र ने ब्राह्मणत्व कैसे प्राप्त किया? धर्मात्मा! पितामह! मैं इसे विस्तारपूर्वक सुनना चाहता हूँ, कृपा करके मुझे बताइए। 1-2॥ | mahabharat अध्याय 13.3: विश्वामित्रको ब्राह्मणत्वकी प्राप्ति कैसे हुई—इस विषयमें युधिष्ठिरका प्रश्न । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युधिष्ठिर उवाच
ब्राह्मण्यं यदि दुष्प्राप्यं त्रिभिर्वर्णैर्नराधिप।
कथं प्राप्तं महाराज क्षत्रियेण महात्मना॥ १॥
विश्वामित्रेण धर्मात्मन् ब्राह्मणत्वं नरर्षभ।
श्रोतुमिच्छामि तत्त्वेन तन्मे ब्रूहि पितामह॥ २॥
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - महाराज! नरेश्वर! यदि अन्य तीनों वर्णों के लिए ब्राह्मणत्व प्राप्त करना अत्यन्त कठिन है, तो क्षत्रिय कुल में उत्पन्न महात्मा विश्वामित्र ने ब्राह्मणत्व कैसे प्राप्त किया? धर्मात्मा! पितामह! मैं इसे विस्तारपूर्वक सुनना चाहता हूँ, कृपा करके मुझे बताइए। 1-2॥
Yudhishthir asked – Maharaj! Nareshwar! If it is very difficult for the other three varnas to attain Brahminhood, then how did Mahatma Vishwamitra, born in a Kshatriya clan, attain Brahminhood? Righteous! Greatest father! I want to hear this in detail, please tell me. 1-2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥