स यज्ञकार: कौन्तेय पित्रोत्सृष्ट: परंतप।
प्रायाद् गर्दभयुक्तेन रथेनाप्याशुगामिना॥ ९॥
अनुवाद
हे शत्रुओं को पीड़ा देने वाले कुन्तीपुत्र! एक दिन अपने पिता के कहने पर मतंग एक भक्त के लिए यज्ञ करने हेतु गधों द्वारा खींचे जाने वाले तीव्रगामी रथ पर सवार होकर चल पड़े।
O son of Kunti, who torments his enemies! One day, on being sent by his father, Matanga set out on a swift chariot drawn by donkeys to perform a yajna for a devotee.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥