चाण्डालय में जन्म लेने वाला मनुष्य कभी भी उस ब्राह्मणत्व को प्राप्त नहीं कर सकता, जो देवताओं, दानवों तथा मनुष्यों में भी परम पवित्र माना जाता है।॥30॥
A person born in a Chandalay (a place of worship) can never attain that Brahminhood which is considered the most sacred among the gods, demons and even among men.'॥ 30॥
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि इन्द्रमतङ्गसंवादे सप्तविंशोऽध्याय: ॥ २७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें इन्द्र और मतंगका संवादविषयक सत्ताईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २७॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥