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mahabharat 13.29.30: चाण्डालय में जन्म लेने वाला मनुष्य कभी भी उस ब्राह्मणत्व को प्राप्त नहीं कर सकता, जो देवताओं, दानवों तथा मनुष्यों में भी परम पवित्र माना जाता है।॥30॥   |   mahabharat अध्याय 13.29: ब्राह्मणत्वके लिये तपस्या करनेवाले मतङ्गकी इन्द्रसे बातचीत   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 29: ब्राह्मणत्वके लिये तपस्या करनेवाले मतङ्गकी इन्द्रसे बातचीत  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  13.29.30 
देवतासुरमर्त्येषु यत् पवित्रं परं स्मृतम्।
चण्डालयोनौ जातेन न तत् प्राप्यं कथंचन॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
चाण्डालय में जन्म लेने वाला मनुष्य कभी भी उस ब्राह्मणत्व को प्राप्त नहीं कर सकता, जो देवताओं, दानवों तथा मनुष्यों में भी परम पवित्र माना जाता है।॥30॥
 
A person born in a Chandalay (a place of worship) can never attain that Brahminhood which is considered the most sacred among the gods, demons and even among men.'॥ 30॥
 
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि इन्द्रमतङ्गसंवादे सप्तविंशोऽध्याय: ॥ २७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें इन्द्र और मतंगका संवादविषयक सत्ताईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २७॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)