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mahabharat 13.29.25: मैं तुम्हें वर देता हूँ। जो कुछ चाहो, प्रसन्नतापूर्वक माँग लो। जो कुछ तुम्हारे मन में इच्छा हो, वह शीघ्र मुझसे कहो।॥25॥   |   mahabharat अध्याय 13.29: ब्राह्मणत्वके लिये तपस्या करनेवाले मतङ्गकी इन्द्रसे बातचीत   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 29: ब्राह्मणत्वके लिये तपस्या करनेवाले मतङ्गकी इन्द्रसे बातचीत  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  13.29.25 
वरं ददामि ते हन्त वृणीष्व त्वं यदिच्छसि।
यच्चाप्यवाप्यं हृदि ते सर्वं तद् ब्रूहि माचिरम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
मैं तुम्हें वर देता हूँ। जो कुछ चाहो, प्रसन्नतापूर्वक माँग लो। जो कुछ तुम्हारे मन में इच्छा हो, वह शीघ्र मुझसे कहो।॥25॥
 
I grant you a boon. Ask for whatever you want happily. Whatever you desire in your heart, tell me quickly.'॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)