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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 29: ब्राह्मणत्वके लिये तपस्या करनेवाले मतङ्गकी इन्द्रसे बातचीत
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श्लोक 24
श्लोक
13.29.24
तं तथा तपसा युक्तमुवाच हरिवाहन:।
मतङ्ग तप्स्यसे किं त्वं भोगानुत्सृज्य मानुषान्॥ २४॥
अनुवाद
उसे इस प्रकार तपस्या में तत्पर देखकर इन्द्र ने कहा - 'मतंग! तुम मनुष्य-सुखों को त्यागकर तपस्या क्यों कर रहे हो?॥ 24॥
Seeing him engaged in tapasya in this manner Indra said, 'Matang! Why are you renouncing human pleasures and performing tapasya?॥ 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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