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mahabharat 13.29.21: पिता जी! यह मनुष्येतर योनि में उत्पन्न हुआ गधा कह रहा है कि मैं ब्राह्मणी के गर्भ से शूद्र के द्वारा उत्पन्न हुआ हूँ; इसलिए अब मैं महान तप में लगूँगा॥ 21॥   |   mahabharat अध्याय 13.29: ब्राह्मणत्वके लिये तपस्या करनेवाले मतङ्गकी इन्द्रसे बातचीत   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 29: ब्राह्मणत्वके लिये तपस्या करनेवाले मतङ्गकी इन्द्रसे बातचीत  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  13.29.21 
ब्राह्मण्यां वृषलाज्जातं पितर्वेदयतीव माम्।
अमानुषी गर्दभीयं तस्मात् तप्स्ये तपो महत्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
पिता जी! यह मनुष्येतर योनि में उत्पन्न हुआ गधा कह रहा है कि मैं ब्राह्मणी के गर्भ से शूद्र के द्वारा उत्पन्न हुआ हूँ; इसलिए अब मैं महान तप में लगूँगा॥ 21॥
 
Father! This donkey born in a non-human form is saying that I was born from a Brahmin woman's womb by a Shudra; therefore, now I will engage myself in great penance. ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)