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mahabharat 13.29.17: गधे ने कहा, "मतंग! तुम एक शूद्र जाति के नाई द्वारा यौवन के मद में चूर ब्राह्मणी के गर्भ से उत्पन्न हुए हो। अतः तुम चाण्डाल हो और तुम्हारी माता के इस व्यभिचार के कारण तुम्हारा ब्राह्मणत्व नष्ट हो गया है।"   |   mahabharat अध्याय 13.29: ब्राह्मणत्वके लिये तपस्या करनेवाले मतङ्गकी इन्द्रसे बातचीत   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 29: ब्राह्मणत्वके लिये तपस्या करनेवाले मतङ्गकी इन्द्रसे बातचीत  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  13.29.17 
गर्दभ्युवाच
ब्राह्मण्यां वृषलेन त्वं मत्तायां नापितेन ह।
जातस्त्वमसि चाण्डालो ब्राह्मण्यं तेन तेऽनशत्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
गधे ने कहा, "मतंग! तुम एक शूद्र जाति के नाई द्वारा यौवन के मद में चूर ब्राह्मणी के गर्भ से उत्पन्न हुए हो। अतः तुम चाण्डाल हो और तुम्हारी माता के इस व्यभिचार के कारण तुम्हारा ब्राह्मणत्व नष्ट हो गया है।"
 
The donkey said, "Matang! You were born from the womb of a Brahmin woman intoxicated with youth, by a barber belonging to the Shudra caste. Therefore you are a Chandala and because of this adulterous act of your mother, your brahminhood has been destroyed."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)