श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 29: ब्राह्मणत्वके लिये तपस्या करनेवाले मतङ्गकी इन्द्रसे बातचीत  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  13.29.15 
ब्रूहि रासभि कल्याणि माता मे येन दूषिता।
कथं मां वेत्सि चण्डालं क्षिप्रं रासभि शंस मे॥ १५॥
 
 
अनुवाद
हे शुभ गधे! मुझे बताओ, किसके कारण मेरी माता का अपमान हुआ है? तुम मुझे चाण्डाल कैसे समझते हो? मुझे शीघ्रता से सब कुछ बताओ॥ 15॥
 
O auspicious donkey! Tell me, because of whom has my mother been disgraced? How do you think I am a Chandala? Tell me everything quickly.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)