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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 29: ब्राह्मणत्वके लिये तपस्या करनेवाले मतङ्गकी इन्द्रसे बातचीत
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श्लोक 14
श्लोक
13.29.14
एतत् श्रुत्वा मतङ्गस्तु दारुणं रासभीवच:।
अवतीर्य रथात् तूर्णं रासभीं प्रत्यभाषत॥ १४॥
अनुवाद
गधे के करुण वचन सुनकर मतंग तुरन्त रथ से उतर पड़े और गधे से इस प्रकार बोले-॥14॥
On hearing the donkey's pitiful words, Matanga immediately got down from the chariot and spoke to the donkey as follows:॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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