श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 29: ब्राह्मणत्वके लिये तपस्या करनेवाले मतङ्गकी इन्द्रसे बातचीत  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  13.29.12 
ब्राह्मणे दारुणं नास्ति मैत्रो ब्राह्मण उच्यते।
आचार्य: सर्वभूतानां शास्ता किं प्रहरिष्यति॥ १२॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण इतना निर्दयी नहीं होता। ब्राह्मण सबके प्रति मित्रवत कहा गया है। जो आचार्य है और सब प्राणियों को उपदेश देता है, वह किसी पर आक्रमण कैसे कर सकता है?॥12॥
 
‘A Brahmin is not so cruel. A Brahmin is said to be friendly towards everyone. How can he, who is an Acharya and preaches to all creatures, attack anyone?॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)