तत्र तीव्रं व्रणं दृष्ट्वा गर्दभी पुत्रगृद्धिनी।
उवाच मा शुच: पुत्र चाण्डालस्त्वधितिष्ठति॥ ११॥
अनुवाद
अपने पुत्र का कल्याण चाहने वाली गधी ने गधे की नाक पर पीड़ादायक घाव देखकर उसे ताकीद भरे स्वर में कहा - 'बेटा! शोक मत करो। तुम्हारे ऊपर ब्राह्मण नहीं, चाण्डाल सवार है।'
The female donkey, who wanted the welfare of her son, seeing the painful wound on the nose of the donkey, said to him in an admonishing tone - 'Son! Do not grieve. It is not a Brahmin but a Chandala who is riding on you.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥