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mahabharat 13.29.10: हे राजन! रथ का भार ढोते समय मतंग ने एक छोटे गधे को उसकी माँ के सामने ही बार-बार कोड़े मारे, जिससे उसकी नाक पर चोट लग गई।   |   mahabharat अध्याय 13.29: ब्राह्मणत्वके लिये तपस्या करनेवाले मतङ्गकी इन्द्रसे बातचीत   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 29: ब्राह्मणत्वके लिये तपस्या करनेवाले मतङ्गकी इन्द्रसे बातचीत  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  13.29.10 
स बालं गर्दभं राजन् वहन्तं मातुरन्तिके।
निरविध्यत् प्रतोदेन नासिकायां पुन: पुन:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! रथ का भार ढोते समय मतंग ने एक छोटे गधे को उसकी माँ के सामने ही बार-बार कोड़े मारे, जिससे उसकी नाक पर चोट लग गई।
 
O King! While carrying the load of the chariot, Mataṅga repeatedly whipped a young donkey in the presence of its mother and injured its nose.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)