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mahabharat 13.29.1-2: युधिष्ठिर ने पूछा, "हे धर्मात्मा राजाओं में श्रेष्ठ! आप बुद्धि, ज्ञान, सदाचार, चरित्र और सभी प्रकार के सद्गुणों से संपन्न हैं। आपकी आयु भी सबसे अधिक है। आप बुद्धि, ज्ञान और तप से प्रतिष्ठित हैं; इसलिए मैं आपसे धर्म के विषय में पूछता हूँ। आपके अतिरिक्त संसार में अन्य कोई ऐसा नहीं है, जिससे सभी प्रकार के प्रश्न पूछे जा सकें।"   |   mahabharat अध्याय 13.29: ब्राह्मणत्वके लिये तपस्या करनेवाले मतङ्गकी इन्द्रसे बातचीत   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 29: ब्राह्मणत्वके लिये तपस्या करनेवाले मतङ्गकी इन्द्रसे बातचीत  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  13.29.1-2 
युधिष्ठिर उवाच
प्रज्ञाश्रुताभ्यां वृत्तेन शीलेन च यथा भवान्।
गुणैश्च विविधै: सर्वैर्वयसा च समन्वित:॥ १॥
भवान् विशिष्टो बुद्‍ध्या च प्रज्ञया तपसा तथा।
तस्माद् भवन्तं पृच्छामि धर्मं धर्मभृतां वर।
नान्यस्त्वदन्यो लोकेषु प्रष्टव्योऽस्ति नराधिप॥ २॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा, "हे धर्मात्मा राजाओं में श्रेष्ठ! आप बुद्धि, ज्ञान, सदाचार, चरित्र और सभी प्रकार के सद्गुणों से संपन्न हैं। आपकी आयु भी सबसे अधिक है। आप बुद्धि, ज्ञान और तप से प्रतिष्ठित हैं; इसलिए मैं आपसे धर्म के विषय में पूछता हूँ। आपके अतिरिक्त संसार में अन्य कोई ऐसा नहीं है, जिससे सभी प्रकार के प्रश्न पूछे जा सकें।"
 
Yudhishthira asked, "O best of the righteous kings! You are endowed with wisdom, knowledge, good conduct, character and all kinds of virtues. Your age is also the greatest. You are distinguished by intelligence, wisdom and penance; therefore, I ask you about religion. There is no one else in the world except you from whom all kinds of questions can be asked. 1-2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)