Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.28.97: ब्रह्मन्! मैंने मन से विचार करके यहाँ गंगाजी के गुणों का केवल एक अंश ही बताया है। यहाँ उनके समस्त गुणों का वर्णन करने की मुझमें शक्ति नहीं है। 97॥ | mahabharat अध्याय 13.28: श्रीगङ्गाजीके माहात्म्यका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उदाहृत: सर्वथा ते गुणानां
मयैकदेश: प्रसमीक्ष्य बुद्ध्या।
शक्तिर्न मे काचिदिहास्ति वक्तुं
गुणान् सर्वान् परिमातुं तथैव॥ ९७॥
अनुवाद
ब्रह्मन्! मैंने मन से विचार करके यहाँ गंगाजी के गुणों का केवल एक अंश ही बताया है। यहाँ उनके समस्त गुणों का वर्णन करने की मुझमें शक्ति नहीं है। 97॥
Brahman! After careful consideration with my mind, I have told only a part of the qualities of Gangaji here. I don't have the strength to describe all his qualities here. 97॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥