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mahabharat 13.28.91: जो सबका कारण है, श्रेष्ठ है, काम-गुणों से रहित है, अत्यंत सूक्ष्म है, मृतकों के लिए सुखदायक शय्या है, शीघ्र बहने वाला है, पवित्र जल का स्रोत है, यश देने वाला है, जगत का रक्षक है, शुभ स्वरूप है और कामनाओं की पूर्ति करने वाला है, उसमें स्नान करने वालों के लिए वह स्वर्ग का मार्ग बन जाता है।   |   mahabharat अध्याय 13.28: श्रीगङ्गाजीके माहात्म्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 28: श्रीगङ्गाजीके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 91
 
 
श्लोक  13.28.91 
योनिर्वरिष्ठा विरजा वितन्वी
शय्याचिरा वारिवहा यशोदा।
विश्वावती चाकृतिरिष्टसिद्धा
गङ्गोक्षितानां भुवनस्य पन्था:॥ ९१॥
 
 
अनुवाद
जो सबका कारण है, श्रेष्ठ है, काम-गुणों से रहित है, अत्यंत सूक्ष्म है, मृतकों के लिए सुखदायक शय्या है, शीघ्र बहने वाला है, पवित्र जल का स्रोत है, यश देने वाला है, जगत का रक्षक है, शुभ स्वरूप है और कामनाओं की पूर्ति करने वाला है, उसमें स्नान करने वालों के लिए वह स्वर्ग का मार्ग बन जाता है।
 
The reason for all, the best, devoid of sexual qualities, extremely subtle, a pleasant bed for dead beings, fast flowing, a source of sacred water, a giver of fame, a protector of the world, an embodiment of good and a fulfillment of desires, becomes the path to heaven for those who bathe in it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)