Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.28.87: जिनकी कीर्ति आकाश, स्वर्ग, पृथ्वी, दिशाओं और उपदिशाओं में फैली हुई है, उन नदियों में श्रेष्ठ भगवती भागीरथी का जल पीकर सभी मनुष्य तृप्त हो जाते हैं ॥87॥ | mahabharat अध्याय 13.28: श्रीगङ्गाजीके माहात्म्यका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ख्यातिर्यस्या: खं दिवं गां च नित्यं
पुरा दिशो विदिशश्चावतस्थे।
तस्या जलं सेव्य सरिद्वराया
मर्त्या: सर्वे कृतकृत्या भवन्ति॥ ८७॥
अनुवाद
जिनकी कीर्ति आकाश, स्वर्ग, पृथ्वी, दिशाओं और उपदिशाओं में फैली हुई है, उन नदियों में श्रेष्ठ भगवती भागीरथी का जल पीकर सभी मनुष्य तृप्त हो जाते हैं ॥87॥
Whose fame has spread in the sky, heaven, earth, directions and sub-directions, all human beings get fulfilled by drinking the water of Bhagwati Bhagirathi, the best among the rivers. ॥ 87॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥