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mahabharat 13.28.79: पृथ्वी, आकाश और स्वर्ग में रहने वाले छोटे-बड़े सभी प्राणियों को नियमित रूप से गंगा में स्नान करना चाहिए। यही सत्पुरुष का सर्वश्रेष्ठ कर्म है ॥79॥   |   mahabharat अध्याय 13.28: श्रीगङ्गाजीके माहात्म्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 28: श्रीगङ्गाजीके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  13.28.79 
भूस्थै: स्व:स्थैर्दिविष्ठैश्च भूतैरुच्चावचैरपि।
गङ्गा विगाह्या सततमेतत् कार्यतमं सताम्॥ ७९॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वी, आकाश और स्वर्ग में रहने वाले छोटे-बड़े सभी प्राणियों को नियमित रूप से गंगा में स्नान करना चाहिए। यही सत्पुरुष का सर्वश्रेष्ठ कर्म है ॥79॥
 
All living beings, big or small, living on earth, sky and heaven should regularly bathe in the Ganges. This is the best deed of a good person. ॥ 79॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)