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श्लोक 13.28.77  |
पूर्णमिन्दुं यथा दृष्ट्वा नृणां दृष्टि: प्रसीदति।
तथा त्रिपथगां दृष्ट्वा नृणां दृष्टि: प्रसीदति॥ ७७॥ |
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| अनुवाद |
| जैसे पूर्ण चन्द्रमा को देखकर मनुष्यों की दृष्टि प्रसन्न हो जाती है, उसी प्रकार त्रिपथ गंगा को देखकर मनुष्यों के नेत्र आनन्द से खिल उठते हैं ॥77॥ |
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| Just as the sight of humans becomes happy after seeing the full moon, in the same way the eyes of humans blossom with joy after seeing the Tripatha Ganga. 77॥ |
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