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mahabharat 13.28.72: भगवान महेश्वर आकाश से गिरने वाली परम पवित्र नदी गंगा को अपने सिर पर धारण करते हैं और स्वर्ग में उसका सेवन करते हैं। 72.   |   mahabharat अध्याय 13.28: श्रीगङ्गाजीके माहात्म्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.28.72 
महापुण्यां च गगनात् पतन्तीं वै महेश्वर:।
दधार शिरसा गङ्गां तामेव दिवि सेवते॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
भगवान महेश्वर आकाश से गिरने वाली परम पवित्र नदी गंगा को अपने सिर पर धारण करते हैं और स्वर्ग में उसका सेवन करते हैं। 72.
 
Lord Maheshwar holds the most sacred river Ganga falling from the sky on his head and consumes it in heaven. 72.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)