| श्री महाभारत » पर्व 13: अनुशासन पर्व » अध्याय 28: श्रीगङ्गाजीके माहात्म्यका वर्णन » श्लोक 71 |
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| | | | श्लोक 13.28.71  | न भयेभ्यो भयं तस्य न पापेभ्यो न राजत:।
आ देहपतनाद् गङ्गामुपास्ते य: पुमानिह॥ ७१॥ | | | | | | अनुवाद | | जो मनुष्य जीवनपर्यन्त यहाँ गंगाजी की पूजा करता है, उसे भयंकर वस्तुओं, पापों और राजा का भी भय नहीं रहता ॥ 71॥ | | | | A person who worships Gangaji here throughout his life has no fear of fearful things, sins or even the king. ॥ 71॥ | | ✨ ai-generated | | |
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