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अध्याय 28: श्रीगङ्गाजीके माहात्म्यका वर्णन
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श्लोक 71
श्लोक
13.28.71
न भयेभ्यो भयं तस्य न पापेभ्यो न राजत:।
आ देहपतनाद् गङ्गामुपास्ते य: पुमानिह॥ ७१॥
अनुवाद
जो मनुष्य जीवनपर्यन्त यहाँ गंगाजी की पूजा करता है, उसे भयंकर वस्तुओं, पापों और राजा का भी भय नहीं रहता ॥ 71॥
A person who worships Gangaji here throughout his life has no fear of fearful things, sins or even the king. ॥ 71॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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