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भूतभव्यभविष्यज्ञैर्महर्षिभिरुपस्थिताम्।
देवै: सेन्द्रैश्च को गङ्गां नोपसेवेत मानव:॥ ६८॥
अनुवाद
भूत, भविष्य और वर्तमान को जानने वाले महर्षियों तथा इन्द्र आदि देवताओं द्वारा पूजित उस गंगा का सेवन कौन मनुष्य नहीं करेगा? ॥68॥
Which human being will not consume the Ganga which is worshipped by great sages who know the past, present and future and by gods like Indra etc.? ॥ 68॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥