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mahabharat 13.28.63: जो मनुष्य गंगाजी की महिमा सुनता है, उनके तट पर जाने, उन्हें देखने, उनके जल को पीने, उन्हें स्पर्श करने तथा उनके जल में डुबकी लगाने की इच्छा रखता है, उसके दोनों कुलों का भगवती गंगाजी विशेष रूप से उद्धार करती हैं ॥ 63॥   |   mahabharat अध्याय 13.28: श्रीगङ्गाजीके माहात्म्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 28: श्रीगङ्गाजीके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  13.28.63 
श्रुताभिलषिता पीता स्पृष्टा दृष्टावगाहिता।
गङ्गा तारयते नॄणामुभौ वंशौ विशेषत:॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य गंगाजी की महिमा सुनता है, उनके तट पर जाने, उन्हें देखने, उनके जल को पीने, उन्हें स्पर्श करने तथा उनके जल में डुबकी लगाने की इच्छा रखता है, उसके दोनों कुलों का भगवती गंगाजी विशेष रूप से उद्धार करती हैं ॥ 63॥
 
A man who listens to the glory of Gangaji, desires to go to her banks, sees her, drinks her water, touches it and takes a dip in her water, Goddess Ganga especially uplifts both his families. ॥ 63॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)